Mukhymantri Rajshri Yojana:2025 राजस्थान सरकार की एक अत्यंत महत्वपूर्ण योजना है जो बालिकाओं के कल्याण और सशक्तिकरण के लिए शुरू की गई है। इस योजना की शुरुआत 1 जून 2016 में हुई थी और अब इसे लाडो प्रोत्साहन योजना के नाम से भी जाना जाता है। इस व्यापक योजना के तहत राज्य सरकार बालिकाओं को जन्म से लेकर 21 वर्ष की आयु तक कुल ₹1.50 लाख की आर्थिक सहायता प्रदान करती है जो 7 किस्तों में दी जाती है। यह योजना न केवल वित्तीय सहायता प्रदान करती है बल्कि बेटियों की शिक्षा, स्वास्थ्य और समग्र विकास को भी बढ़ावा देती है। राजस्थान में बालिकाओं के जन्म को प्रोत्साहित करने, कन्या भ्रूण हत्या को रोकने, और लिंग अनुपात में सुधार लाने के लिए यह योजना एक महत्वपूर्ण कदम है।
Table of Contents
योजना का इतिहास और विकास प्रारंभिक चरण (2016)
Mukhymantri Rajshri Yojana की शुरुआत जून 2016 में राजस्थान सरकार द्वारा की गई थी। प्रारंभ में इस योजना के तहत बालिकाओं को ₹50,000 की आर्थिक सहायता 6 किस्तों में प्रदान की जाती थी। इस योजना का मुख्य उद्देश्य बालिकाओं की साक्षरता दर में वृद्धि करना, उनके स्वास्थ्य की देखभाल करना और समाज में लैंगिक भेदभाव को कम करना था।
राजश्री से लाडो प्रोत्साहन योजना में परिवर्तन
वर्ष 2024 में इस योजना में महत्वपूर्ण बदलाव किए गए। 1 अगस्त 2024 से राजश्री योजना को लाडो प्रोत्साहन योजना के नाम से संचालित किया जाने लगा। इस नए स्वरूप में आर्थिक सहायता की राशि को ₹50,000 से बढ़ाकर पहले ₹1 लाख और फिर ₹1.50 लाख कर दिया गया। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने 12 मार्च 2025 को बजट चर्चा के दौरान इस राशि को ,बढ़ाने की घोषणा की थी।

योजना की संरचना और वित्तीय लाभ
लाडो प्रोत्साहन Yojana,के तहत अब बालिकाओं को कुल ₹1.50 लाख की आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है जो निम्नलिखित 7 किस्तों में विभाजित है:
पहली किस्त: बालिका के जन्म पर – ₹2,500
दूसरी किस्त: 1 वर्ष की आयु पूर्ण होने और टीकाकरण के बाद – ₹2,500
तीसरी किस्त: कक्षा 1 में प्रवेश पर – ₹4,000
चौथी किस्त: कक्षा 6 में प्रवेश पर – ₹5,000
पांचवी किस्त: कक्षा 10 में प्रवेश पर – ₹11,000
छठी किस्त: कक्षा 12 में प्रवेश पर – ₹25,000
सातवीं किस्त: स्नातक उत्तीर्ण करने, और 21 वर्ष की आयु पूर्ण होने पर-₹1,00,000
भुगतान प्रक्रिया
मूलभूत आवश्यकताएं
लाडो प्रोत्साहन योजना का लाभ उठाने के लिए निम्नलिखित पात्रता मानदंड निर्धारित किए गए हैं:
- बालिका का जन्म,1 जून 2016 या ,उसके बाद होना चाहिए
- प्रसूता (माता) राजस्थान की मूल निवासी होनी चाहिए
- बालिका का जन्म राजकीय चिकित्सा संस्थान या जननी सुरक्षा योजना से पंजीकृत निजी अस्पताल में होना चाहिए
- लाडो प्रोत्साहन योजना में जाति, धर्म, वर्ग या आय सीमा की कोई बाध्यता नहीं है
संस्थागत प्रसव की आवश्यकता
योजना का लाभ केवल उन बालिकाओं को मिलता है जिनका जन्म सरकारी अस्पताल या जननी सुरक्षा योजना से मान्यता प्राप्त निजी चिकित्सा संस्थानों में हुआ है। यह शर्त संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देने और मातृ एवं शिशु मृत्यु दर को कम करने के उद्देश्य से रखी गई है।
शिक्षा संबंधी पात्रता
स्वचालित पंजीकरण
लाडो प्रोत्साहन योजना की एक विशेषता यह है कि इसके लिए अलग से आवेदन करने की आवश्यकता नहीं है। राजकीय चिकित्सा संस्थान या जननी सुरक्षा योजना से अधिकृत निजी अस्पताल में जन्म लेने वाली बालिकाओं का डेटा स्वचालित रूप से संबंधित विभागों के पोर्टल पर अपलोड हो जाता है। सरकार इसी डेटा के आधार पर बालिका का पंजीकरण करती है।
ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया
यदि किसी कारणवश स्वचालित पंजीकरण नहीं हुआ है, तो निम्नलिखित प्रक्रिया के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन किया जा सकता है:
- राजस्थान सरकार के जनकल्याण पोर्टल (https://jankalyan.rajasthan.gov.in/) पर जाएं
- राजश्री योजना/लाडो प्रोत्साहन योजना का विकल्प चुनें home loan calculator
- “Apply Online” बटन पर क्लिक करें newskhabar.net
- यदि खाता नहीं है तो नया यूजर अकाउंट बनाएं Mukhymantri Rajshri Yojana
- आवश्यक जानकारी भरें और दस्तावेज अपलोड करें सितंबर 2025 MP Political News
- आवेदन सबमिट करें Sukanya,Samriddhi,Yojana 2024
- यह है मुख्यमंत्री राजश्री योजना 2025 का आधिकारिक वेबसाइट लिंक:
- Mukhyamantri Rajshri Yojana — राजस्थान सरकार का सरकारी पोर्टल (myScheme)
आप इसे अपने लेख में लिंक के रूप में इस्तेमाल कर सकते हैं।

ऑफलाइन आवेदन
- जिले के स्वास्थ्य अधिकारी से संपर्क करें
- जिला परिषद, कलेक्टर कार्यालय या ग्राम पंचायत से आवेदन फॉर्म प्राप्त करें
- फॉर्म को सावधानीपूर्वक भरें
- आवश्यक दस्तावेजों के साथ फॉर्म जमा करें
- तहसील अधिकारी द्वारा सत्यापन के बाद जिला कल्याण अधिकारी को भेजा जाता है
पहचान और पता संबंधी दस्तावेज
योजना का लाभ उठाने के लिए निम्नलिखित दस्तावेजों की आवश्यकता होती है:
- बालिका का जन्म प्रमाण पत्र
- माता-पिता का आधार कार्ड
- माता का भामाशाह कार्ड या जन आधार कार्ड
- बैंक खाता पासबुक
- पासपोर्ट साइज फोटोग्राफ
- मोबाइल नंबर
शिक्षा संबंधी दस्तावेज
शैक्षणिक किस्तों के लिए अतिरिक्त दस्तावेजों की आवश्यकता होती है:
- स्कूल प्रवेश प्रमाण पत्र (कक्षा 1, 6, 10, 12 के लिए)
- 12वीं कक्षा की मार्कशीट (यदि लागू हो)
- कॉलेज एडमिशन सर्टिफिकेट (स्नातक के लिए)
- टीकाकरण रिकॉर्ड (प्रारंभिक किस्तों के लिए)
स्वास्थ्य संबंधी दस्तावेज
प्रारंभिक किस्तों के लिए स्वास्थ्य संबंधी दस्तावेज आवश्यक हैं:
- PCTS (प्रेग्नेंसी चाइल्ड ट्रैकिंग एंड हेल्थ सर्विसेज) कार्ड
- टीकाकरण कार्ड
- संस्थागत प्रसव का प्रमाण पत्र
योजना के मुख्य उद्देश्य
लाडो प्रोत्साहन योजना के प्राथमिक उद्देश्य व्यापक सामाजिक सुधार से जुड़े हुए हैं:
- बालिका जन्म के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित करना
- कन्या भ्रूण हत्या की रोकथाम करना
- लिंग अनुपात में सुधार लाना
- बाल विवाह की प्रथा को हतोत्साहित करना
- समाज में बेटियों के प्रति सम्मान की भावना विकसित करना
शैक्षणिक सशक्तिकरण
योजना का एक महत्वपूर्ण घटक शिक्षा के माध्यम से बालिकाओं का सशक्तिकरण है:
- बालिकाओं की साक्षरता दर में वृद्धि
- स्कूल छोड़ने की दर (ड्रॉप-आउट रेट) में कमी
- उच्च शिक्षा तक पहुंच में सुधार
- तकनीकी और व्यावसायिक शिक्षा को बढ़ावा देना
स्वास्थ्य सुधार
- संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देना
- मातृ मृत्यु दर में कमी लाना
- शिशु मृत्यु दर में कमी लाना
- बालिकाओं के पोषण स्तर में सुधार
योजना का कार्यान्वयन
लाडो प्रोत्साहन योजना का सफल कार्यान्वयन कई विभागों के सहयोग से होता है:
- महिला एवं बाल विकास विभाग: मुख्य नोडल विभाग
- चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग: जन्म पंजीकरण और स्वास्थ्य सेवाएं
- शिक्षा विभाग: शैक्षणिक प्रगति की निगरानी
सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग: समग्र कल्याण योजनाओं का समन्वय
निगरानी और मूल्यांकन
योजना की प्रभावशीलता सुनिश्चित करने के लिए नियमित निगरानी की जाती है:
- कलेक्टर द्वारा हर तीन महीने में समीक्षा
- जिला स्तर पर प्रगति रिपोर्ट का संकलन
- राज्य स्तर पर वार्षिक मूल्यांकन

पारदर्शिता की व्यवस्था
योजना में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए:
- डिजिटल प्लेटफॉर्म का उपयोग
- DBT के माध्यम से सीधा भुगतान
- ऑनलाइन ट्रैकिंग सिस्टम
योजना के सामाजिक प्रभाव
राजस्थान में लाडो प्रोत्साहन योजना के कारण बालिकाओं के जन्म दर में सकारात्मक प्रभाव देखा गया है। योजना ने समाज में बेटियों के प्रति दृष्टिकोण बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। परिवार अब बेटी के जन्म को आर्थिक बोझ के रूप में नहीं बल्कि एक अवसर के रूप में देखते हैं।
शैक्षणिक सुधार
योजना के कारण राजस्थान में बालिका शिक्षा में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। स्कूल में नामांकन दर बढ़ी है और ड्रॉप-आउट दर में कमी आई है। विशेष रूप से माध्यमिक और उच्च माध्यमिक स्तर पर बालिकाओं की उपस्थिति में वृद्धि हुई है।
आर्थिक सशक्तिकरण
योजना के माध्यम से मिलने वाली आर्थिक सहायता ने परिवारों की वित्तीय स्थिति में सुधार लाया है। विशेष रूप से गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों को बेटियों की शिक्षा के लिए अलग से पैसे की व्यवस्था करने की चिंता नहीं करनी पड़ती।
दस्तावेज संबंधी समस्याएं
आवश्यक दस्तावेजों की कमी की समस्या के लिए:
- सरलीकृत दस्तावेज प्रक्रिया
- वैकल्पिक प्रमाणीकरण की व्यवस्था
- शिविर आयोजन करके दस्तावेज बनवाने की सुविधा
भविष्य की योजनाएं
राज्य सरकार भविष्य में आर्थिक सहायता की राशि को और बढ़ाने पर विचार कर रही है। वर्तमान में ₹1.50 लाख की राशि को बढ़ाकर ₹2 लाख तक करने की चर्चा हो रही है।
योजना का विस्तार
योजना के दायरे को बढ़ाकर निम्नलिखित क्षेत्रों में विस्तार की योजना है:
- व्यावसायिक प्रशिक्षण के लिए अतिरिक्त सहायता
- उद्यमिता विकास के लिए विशेष पैकेज
- विवाह के समय अतिरिक्त सहायता
डिजिटल सुधार
भविष्य में योजना को और अधिक डिजिटल बनाने की योजना है:
- मोबाइल ऐप का विकास
- AI और मशीन लर्निंग का उपयोग
- ब्लॉकचेन तकनीक से पारदर्शिता में सुधार
अन्य राज्यों के साथ तुलना
राजस्थान की लाडो प्रोत्साहन योजना भारत की सबसे व्यापक बालिका कल्याण योजनाओं में से एक है। अन्य राज्यों की समान योजनाओं की तुलना में यह निम्नलिखित मामलों में आगे है:
- मध्य प्रदेश की लाडली लक्ष्मी योजना: ₹1.18 लाख
- हरियाणा की लाडली योजना: ₹5,000 प्रति वर्ष
- दिल्ली की लाडली योजना: ₹35,000 तक
विशिष्टताएं
राजस्थान की योजना की विशेषताएं:
- सबसे अधिक आर्थिक सहायता (₹1.50 लाख)
- जन्म से स्नातक तक निरंतर सहायता
- जाति-धर्म की बाध्यता का अभाव
- डिजिटल पेमेंट सिस्टम
- सफलता की कहानियां
योजना से लाभान्वित होने वाली हजारों बालिकाएं आज उच्च शिक्षा प्राप्त कर रही हैं। कई बालिकाओं ने इंजीनियरिंग, मेडिकल और अन्य प्रोफेशनल कोर्स में प्रवेश लिया है। यह योजना विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों की बालिकाओं के लिए जीवन बदलने वाली साबित हुई है।
सामाजिक परिवर्तन
समाज में बेटियों के प्रति दृष्टिकोण में सकारात्मक बदलाव आया है। अब परिवार बेटी के जन्म का जश्न मनाते हैं और उनकी शिक्षा में निवेश करते हैं।
योजना में सुधार के सुझाव
योजना की प्रभावशीलता बढ़ाने के लिए निम्नलिखित सुझाव हैं:
- मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं को शामिल करना
- कौशल विकास प्रशिक्षण की व्यवस्था
- करियर काउंसलिंग की सुविधा
- डिजिटल साक्षरता को बढ़ावा देना
नीतिगत सुधार
- योजना के लिए अलग बजट आवंटन
- राज्य से बाहर पढ़ने वाली बालिकाओं के लिए विशेष प्रावधान
- निजी क्षेत्र के साथ साझेदारी
निष्कर्ष
Mukhymantri Rajshri Yojana,जो अब लाडो प्रोत्साहन योजना के नाम से जानी जाती है, राजस्थान सरकार की एक दूरदर्शी पहल है जिसने बालिका कल्याण के क्षेत्र में एक नया मानदंड स्थापित किया है। ₹1.50 लाख की आर्थिक सहायता के साथ यह योजना न केवल वित्तीय सहारा प्रदान करती है बल्कि बेटियों के प्रति समाज की मानसिकता को भी बदलती है।
इस योजना की सबसे बड़ी उपलब्धि यह है कि इसने बेटियों के जन्म को एक उत्सव का कारण बना दिया है। जन्म से लेकर स्नातक तक की यात्रा में सरकार हर कदम पर बालिकाओं का साथ देती है, जिससे उनका आत्मविश्वास बढ़ता है और वे अपने सपनों को साकार करने में सफल होती हैं।
योजना की व्यापकता इसमें है कि यह केवल आर्थिक सहायता तक सीमित नहीं है बल्कि स्वास्थ्य, शिक्षा और सामाजिक सशक्तिकरण के सभी पहलुओं को समेटती है। डिजिटल प्लेटफॉर्म का उपयोग, DBT के माध्यम से पारदर्शी भुगतान, और जाति-धर्म की बाध्यता का न होना इसकी प्रगतिशील सोच को दर्शाता है।
भविष्य में इस योजना का और भी विस्तार होने की संभावना है। राज्य सरकार की प्रतिबद्धता और जनता का सहयोग मिलकर राजस्थान को बालिका सशक्तिकरण के क्षेत्र में एक आदर्श राज्य बनाने की दिशा में काम कर रहे हैं। यह योजना अन्य राज्यों के लिए भी एक मॉडल के रूप में काम कर रही है और बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ के राष्ट्रीय लक्ष्य को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण योगदान दे रही है।
आने वाले समय में यह योजना राजस्थान की बेटियों के लिए नए अवसरों के द्वार खोलेगी और उन्हें आत्मनिर्भर एवं सशक्त नागरिक बनाने में सहायक होगी। यह न केवल व्यक्तिगत सफलता की कहानी है बल्कि समाज के सामूहिक विकास का भी प्रतीक है।
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