Mukhymantri Bihar Mahila Rojgar Yojana 2025 एक ऐतिहासिक पहल है जो बिहार की महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। 29 अगस्त 2025 को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में इस योजना को मंजूरी दी गई थी। यह योजना महिला सशक्तिकरण की दिशा में बिहार सरकार की एक महत्वाकांक्षी परियोजना है जिसका मुख्य लक्ष्य प्रत्येक परिवार की एक महिला को अपनी पसंद का रोजगार शुरू करने के लिए आर्थिक सहायता प्रदान करना है। इस योजना के तहत महिलाओं को पहली किस्त के रूप में 10,000 रुपये की आर्थिक सहायता दी जाएगी, और बाद में आकलन के आधार पर 2 लाख रुपये तक की अतिरिक्त वित्तीय सहायता प्रदान की जा सकती है।
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योजना का परिचय और उद्देश्य
Mukhymantri Bihar Mahila Rojgar Yojana का मुख्य उद्देश्य बिहार राज्य के हर परिवार की एक महिला को स्वरोजगार के अवसर प्रदान करना है। यह योजना महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने और उन्हें समाज में एक सम्मानजनक स्थान दिलाने के लिए शुरू की गई है। बिहार में 2.7 करोड़ परिवार रहते हैं और सरकार का लक्ष्य है कि प्रत्येक परिवार से एक महिला को इस योजना से जोड़ा जाए।
इस योजना का क्रियान्वयन ग्रामीण विकास विभाग, बिहार सरकार द्वारा बिहार ग्रामीण जीविकोपार्जन प्रोत्साहन समिति (जीविका) के माध्यम से किया जा रहा है। राज्य के शहरी क्षेत्रों में योजना के क्रियान्वयन हेतु नगर विकास एवं आवास विभाग का सहयोग लिया जा रहा है। योजना का मुख्य नारा “सशक्त उद्यम… सशक्त महिलाएँ… सशक्त बिहार…” है।
योजना के मुख्य लक्ष्य
- योजना के तहत निम्नलिखित मुख्य लक्ष्य निर्धारित किए गए हैं:
- प्रत्येक परिवार की एक महिला को स्वरोजगार के लिए प्रारंभिक वित्तीय सहायता प्रदान करना
- महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाना
- राज्य की अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाना
- महिला उद्यमिता को बढ़ावा देना
- ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करना
- योजना की विस्तृत विशेषताएं
वित्तीय सहायता की संरचना
प्रथम किस्त: योजना के तहत आर्थिक सहायता के रूप में प्रत्येक परिवार की एक महिला को अपनी पसंद का रोजगार करने हेतु 10,000 रुपए की राशि प्रथम किस्त के रूप में दी जाएगी। यह राशि डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के माध्यम से सीधे महिलाओं के बैंक खाते में भेजी जाएगी।
अतिरिक्त सहायता: महिलाओं द्वारा रोजगार आरंभ करने के उपरांत 6 महीने बाद आकलन कर 2 लाख रुपए तक की अतिरिक्त वित्तीय सहायता आवश्यकतानुसार दी जाएगी। यह अतिरिक्त सहायता चरणबद्ध तरीके से दी जाएगी:
- 15,000 रुपये की दूसरी किस्त
- 75,000 रुपये की तीसरी किस्त
- अधिकतम 2 लाख रुपये तक की सहायता
ब्याज दर: अतिरिक्त वित्तीय सहायता पर 12% प्रति वर्ष की दर से ब्याज लगेगा और इसकी वापसी की अवधि 1 से 3 वर्ष तक निर्धारित की गई है।
पहली किस्त की तिथि
Mukhymantri Bihar Mahila Rojgar Yojana की पहली किस्त 15 सितंबर 2025 से महिलाओं के बैंक खातों में आना शुरू हो गई है। ग्रामीण विकास विभाग ने पूरी तैयारी कर ली है और DBT के माध्यम से राशि का हस्तांतरण शुरू कर दिया गया है।
पात्रता मानदंड
योजना का लाभ उठाने के लिए निम्नलिखित पात्रता मानदंड निर्धारित किए गए हैं:
आयु सीमा: आवेदिका की उम्र 18 से 60 वर्ष के बीच होनी चाहिए।
निवास: आवेदक महिला बिहार राज्य की स्थायी निवासी होनी चाहिए।
स्वयं सहायता समूह की सदस्यता: योजना का लाभ लेने हेतु इच्छुक महिलाओं को जीविका स्वयं सहायता समूह से जुड़ना अनिवार्य है।
पारिवारिक पात्रता:
- आवेदिका स्वयं अथवा उनके पति आयकर दाता की श्रेणी में न हो
- आवेदिका स्वयं अथवा उनके पति सरकारी सेवा (नियमित/संविदा) में न हो
परिवार की परिभाषा
योजना के अंतर्गत ‘परिवार से आशय’ है – पति-पत्नी और उनके अविवाहित बच्चे। अविवाहित वयस्क महिला जिनके माता-पिता जीवित नहीं हो, उन्हें योजना के प्रयोजनार्थ एकल परिवार माना जाएगा एवं नियमानुसार लाभ प्रदान किया जाएगा। एक परिवार से केवल एक महिला को इस योजना का लाभ मिलेगा।
शहरी क्षेत्रों के लिए आवेदन प्रक्रिया
ऑनलाइन आवेदन: शहरी क्षेत्र की महिलाओं को आवेदन करने हेतु जीविका की वेबसाइट (www.brlps.in) पर लिंक उपलब्ध है। महिलाएं mmry.brlps.in पर भी जाकर आवेदन कर सकती हैं।
आवश्यक जानकारी: योजना का लाभ लेने की इच्छुक महिलाओं द्वारा पंजीकरण करते समय अपना मोबाइल नंबर, आधार संख्या, बैंक खाता विवरण एवं व्यवसाय का प्रकार अनिवार्य रूप से दर्ज करना होगा।
दस्तावेज अपलोड: आवेदक को अपने आधार कार्ड, बैंक पासबुक (जिसमें नाम, खाता संख्या, IFSC कोड अंकित हो), फोटोग्राफ एवं सादे पृष्ठ पर हस्ताक्षर की स्कैन कॉपी अपलोड करनी होगी।
स्वयं सहायता समूह में शामिल होना: शहरी क्षेत्र की महिलाएं जो पूर्व से ही स्वयं सहायता समूह से जुड़ी हैं उन्हें ऑनलाइन आवेदन करने की आवश्यकता नहीं है। जो महिलाएं स्वयं सहायता समूह से नहीं जुड़ी हैं, उनके ऑनलाइन आवेदन प्राप्ति के उपरांत उन्हें समूह में जोड़ने हेतु उनके क्षेत्र में कार्यरत सामुदायिक संसाधन सेवी द्वारा संपर्क किया जाएगा।
ग्रामीण क्षेत्रों के लिए आवेदन प्रक्रिया
ऑफलाइन आवेदन: जीविका स्वयं सहायता समूह से जुड़े सभी सदस्य इस योजना के पात्र होंगे। वे इस योजना का लाभ लेने के लिए अपने ग्राम संगठन में जाकर आवेदन करेंगी।
समूह बैठक: समूह के सभी सदस्यों की एक विशेष बैठक ग्राम संगठन स्तर पर आयोजित की जाएगी जिसमें एक समूह के सभी सदस्यों का एक समेकित प्रपत्र में आवेदन लिया जाएगा।
नए सदस्यों के लिए: जो महिलाएं जीविका स्वयं सहायता समूह से नहीं जुड़ी हैं उन्हें योजना का लाभ प्राप्त करने हेतु सर्वप्रथम स्वयं सहायता समूह में जुड़ने के लिए अपना आवेदन संबंधित ग्राम संगठन में निर्धारित प्रपत्र में जमा करना होगा।

आवश्यक दस्तावेज
योजना के लिए ,आवेदन करने हेतु निम्नलिखित दस्तावेज आवश्यक हैं: /
- आधार कार्ड (अनिवार्य)
- बैंक पासबुक (आधार से लिंक्ड अकाउंट)
- निवास प्रमाण पत्र
- पासपोर्ट साइज फोटो
- मोबाइल नंबर
- जीविका समूह की सदस्यता का प्रमाण पत्र
- हस्ताक्षर की स्कैन कॉपी
महत्वपूर्ण नोट: आवेदन के लिए केवल तीन मुख्य दस्तावेज आवश्यक हैं – आधार कार्ड, बैंक पासबुक और मोबाइल नंबर। बैंक खाता आधार कार्ड से लिंक होना चाहिए और DBT सक्रिय होना चाहिए।
योजना के तहत उपलब्ध व्यवसाय
Mukhymantri Bihar Mahila Rojgar Yojana के तहत 18 प्रकार के व्यवसाय शुरू करने के लिए आर्थिक सहायता उपलब्ध है:
मुख्य व्यवसाय विकल्प:
- किराना की दुकान
- सब्जी-फल की दुकान
- ब्यूटी पार्लर
- मोबाइल रिपेयरिंग
- स्टेशनरी की दुकान
- डेयरी (दूध का व्यवसाय)
- सिलाई-कढ़ाई का काम
- चाय-पकौड़े की दुकान
- हस्तशिल्प का काम
- पशुपालन (गाय, भैंस)
- बकरी पालन
- मुर्गी पालन
- खेती से जुड़े काम
- ई-रिक्शा या ऑटो रिक्शा
- कैटरिंग सेवा
- फूड प्रोसेसिंग
- हैंडलूम और टेक्सटाइल
- अन्य व्यवसाय
सबसे ज्यादा आवेदन चाय और पकौड़े की दुकान लगाने को लेकर आए हैं। इसके बाद ग्रामीण क्षेत्र की महिलाएं पशुपालन (बकरी, मुर्गी, गौपालन) और किराना दुकान खोलने को लेकर आवेदन दे रही हैं।

योजना की वर्तमान स्थिति और प्रगति
योजना के प्रति महिलाओं में व्यापक उत्साह देखा जा रहा है। विभिन्न जिलों से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार:
भोजपुर जिला: केवल दो दिनों में 1.95 लाख से अधिक महिलाओं ने आवेदन किया है। यह जिले में कुल जीविका सदस्यों का 78% हिस्सा है।
कैमूर जिला: 10 सितंबर तक 10,897 आवेदन प्राप्त हुए हैं। जिले में कुल 18,957 स्वयं सहायता समूह हैं।
राज्यव्यापी: मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना को लेकर करीब एक करोड़ महिलाओं के आवेदन आ चुके हैं।
चुनौतियां
कुछ क्षेत्रों में बाढ़ के कारण आवेदन प्रक्रिया में देरी हो रही है। भोजपुर जिले के छह प्रखंडों में बाढ़ के कारण आवेदन इकट्ठा करने में परेशानी हो रही है।
डेटा अपलोड की प्रक्रिया
सभी आवेदनों को 14 सितंबर तक सरकारी पोर्टल पर अपलोड किया जाना था। प्रखंड स्तर पर आवेदनों का भौतिक सत्यापन किया जा रहा है और सभी विवरणों की जांच के बाद डेटा एंट्री की जा रही है।
महिला सशक्तिकरण
यह योजना महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे न केवल महिलाओं का सशक्तिकरण होगा, बल्कि राज्य की अर्थव्यवस्था को भी बढ़ावा मिलेगा। योजना से महिलाओं को आर्थिक स्वतंत्रता मिलेगी और वे अपने परिवार की आर्थिक स्थिति सुधारने में योगदान दे सकेंगी।
राज्य की अर्थव्यवस्था पर प्रभाव
उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के अनुसार, इस योजना से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी और महिलाएं उद्यमिता के क्षेत्र में अपनी भूमिका निभा सकेंगी। इस योजना के क्रियान्वयन से न सिर्फ महिलाओं की स्थिति और ज्यादा मजबूत होगी, बल्कि राज्य के अंदर ही रोजगार के बेहतर अवसर मिलेंगे।
प्रवासन पर प्रभाव
यह योजना बिहार से लोगों के बाहर जाने की प्रवृत्ति को कम करने में सहायक होगी। रोजगार के अवसर राज्य के भीतर ही मिलने से मजबूरी में लोगों को रोजगार के लिए राज्य से बाहर नहीं जाना पड़ेगा।

हाट-बाजार का विकास
योजना के तहत राज्य में गांवों से लेकर शहरों तक महिलाओं के उत्पादों की बिक्री के लिए हाट बाजार विकसित किए जाएंगे। यह महिलाओं को अपने उत्पादों को बेचने के लिए एक उचित मंच प्रदान करेगा और उनकी आर्थिक स्वतंत्रता को बढ़ावा देगा।
स्थानीय बाजारों या ‘हाट बाजारों’ की स्थापना महिलाओं की आर्थिक स्वतंत्रता को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। इससे महिला उद्यमियों को अपने उत्पादों के लिए बाजार मिलेगा और वे अपने व्यवसाय को आगे बढ़ा सकेंगी।
स्वयं सहायता समूह का महत्व
वर्तमान में राज्य में करीब 10.81 लाख स्वयं सहायता समूह सक्रिय हैं जिनसे 1.34 करोड़ महिलाएं जुड़ी हुई हैं। ये महिलाएं कृषि, पशुपालन, हस्तशिल्प, किराना दुकान, सिलाई, कढ़ाई और छोटे-छोटे उद्योगों के जरिए न सिर्फ अपने घर का खर्च चला रही हैं बल्कि परिवार की आर्थिक हालत भी सुधार रही हैं।
जीविका निधि साख सहकारी संघ
हाल ही में बीआरएलपीएस के तहत जीविका निधि साख सहकारी संघ लिमिटेड बनाया गया है। यह संस्था महिलाओं को बैंक की तरह ही कम ब्याज दर पर कर्ज उपलब्ध कराती है ताकि उन्हें प्राइवेट साहूकारों के चंगुल में न फंसना पड़े।
विशेषताएं:
- डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करता है
- तेज और पारदर्शी फंड ट्रांसफर
- 12,000 सामुदायिक कैडर को टैबलेट उपलब्ध कराए गए हैं
- सभी पंजीकृत क्लस्टर-लेवल फेडरेशन इसके सदस्य बनेंगे
योजना की निगरानी और शिकायत निवारण
योजना के आवेदन या लाभ दिलाने हेतु अगर किसी तरह की राशि की मांग की जाती है तो संबंधित नगर निकाय कार्यालय एवं जीविका के जिला कार्यालय में इसकी शिकायत की जा सकती है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि योजना के पंजीकरण के लिए कोई राशि नहीं मांगी जाएगी।
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निगरानी व्यवस्था
योजना के सफल क्रियान्वयन के लिए निम्नलिखित निगरानी व्यवस्था स्थापित की गई है:
- ग्राम संगठन स्तर पर प्राथमिक जांच
- प्रखंड स्तर पर द्वितीयक सत्यापन
- जिला स्तर पर अंतिम अनुमोदन
- राज्य स्तर पर समग्र निगरानी
सभी प्राप्त आवेदनों का भौतिक सत्यापन किया जाएगा एवं यह भी सुनिश्चित किया जाएगा कि महिला बिहार राज्य की निवासी हो।
योजना का राजनीतिक संदर्भ
यह योजना 2025 के विधानसभा चुनावों से ठीक पहले शुरू की गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह नीतीश कुमार का महिला मतदाताओं को अपनी ओर आकर्षित करने का एक रणनीतिक कदम है। नीतीश कुमार पहले भी शराबबंदी, महिला आरक्षण और शिक्षक बहाली जैसे फैसलों से महिला वोटर्स को अपनी ओर खींच चुके हैं।
Mukhymantri Bihar Mahila Rojgar Yojana को बिहार विधानसभा चुनाव से पहले NDA के लिए मास्टर स्ट्रोक माना जा रहा है। महिलाओं का उत्साह इस बात को दिखाता है कि यह योजना उनके बीच कितनी लोकप्रिय है।
निष्कर्ष
2025 बिहार की महिलाओं के लिए एक क्रांतिकारी पहल है जो उन्हें आर्थिक स्वतंत्रता और सामाजिक सशक्तिकरण प्रदान कर रही है। 10,000 रुपये की प्रारंभिक सहायता और बाद में 2 लाख रुपये तक की अतिरिक्त सहायता के साथ यह योजना महिलाओं को उद्यमिता की राह पर आगे बढ़ने का अवसर प्रदान कर रही है।
योजना की सफलता इसी बात से पता चलती है कि केवल कुछ दिनों में ही करोड़ों महिलाओं ने आवेदन किया है। जीविका स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से इसका क्रियान्वयन एक सुव्यवस्थित तरीके से हो रहा है।
यह योजना न केवल व्यक्तिगत स्तर पर महिलाओं को लाभ पहुंचा रही है बल्कि समग्र रूप से बिहार की अर्थव्यवस्था को भी मजबूत बना रही है। हाट-बाजारों के विकास से महिला उत्पादों को बेचने के लिए उचित मंच मिल रहा है।
इस योजना के सफल क्रियान्वयन से बिहार में महिला सशक्तिकरण का एक नया अध्याय शुरू हो रहा है जो आने वाले वर्षों में राज्य के सामाजिक और आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण योगदान देगा। यह योजना महिलाओं को न केवल आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने में सहायक है बल्कि उन्हें समाज में एक सम्मानजनक स्थान दिलाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
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