Mobile Emergency Alert: मोबाइल पर अचानक क्यों बजने लगा तेज़ सायरन? जानें सरकार के इस बड़े ‘टेस्ट’ का सच

नई दिल्ली: शनिवार, 2 मई 2026 की दोपहर लगभग 11:40 बजे भारत भर में करोड़ों स्मार्टफोन अचानक तेज़ सायरन और वाइब्रेशन के साथ बज उठे।..

Mobile Emergency Alert

नई दिल्ली: शनिवार, 2 मई 2026 की दोपहर लगभग 11:40 बजे भारत भर में करोड़ों स्मार्टफोन अचानक तेज़ सायरन और वाइब्रेशन के साथ बज उठे। जिन लोगों के फोन ‘साइलेंट’ मोड पर थे, उनमें भी यह तेज़ कर्कश आवाज़ सुनाई दी, जिससे एक बारगी लोग किसी अनहोनी की आशंका से सहम गए।

दरअसल, घबराने की कोई बात नहीं है। यह भारत सरकार के दूरसंचार विभाग (DoT) और राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) द्वारा किया गया एक देशव्यापी ‘Emergency Alert System’ का परीक्षण था।

अमित शाह और ज्योतिरादित्य सिंधिया ने किया शुभारंभ

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने आज इस स्वदेशी आपदा संचार प्रणाली का औपचारिक शुभारंभ किया। यह प्रणाली C-DOT (सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ टेलीमेटिक्स) द्वारा विकसित की गई है, जिसका उद्देश्य प्राकृतिक आपदाओं के दौरान लोगों की जान बचाना है।

क्या था वह ‘Extremely Severe Alert’ मैसेज?

यूज़र्स के मोबाइल स्क्रीन पर हिंदी, अंग्रेजी और क्षेत्रीय भाषाओं में एक पॉप-अप संदेश फ्लैश हुआ, जिसके ऊपर ‘Extremely Severe Alert’ लिखा था। संदेश में स्पष्ट किया गया था:

“यह भारत सरकार के दूरसंचार विभाग द्वारा सेल ब्रॉडकास्टिंग सिस्टम के माध्यम से भेजा गया एक नमूना परीक्षण संदेश है। कृपया इस पर ध्यान न दें…”

Cell Broadcast तकनीक: बिना सिम और इंटरनेट के भी करेगा काम

इस नई प्रणाली की सबसे बड़ी खासियत इसकी Cell Broadcast (CB) तकनीक है:

  • बिना इंटरनेट के अलर्ट: इस सिस्टम को काम करने के लिए मोबाइल डेटा या इंटरनेट की जरूरत नहीं होती।
  • बिना सिम कार्ड के भी अलर्ट: यह अलर्ट उन फोनों पर भी प्राप्त किया जा सकता है जिनमें सिम कार्ड सक्रिय नहीं है, बशर्ते फोन चालू हो और नेटवर्क सिग्नल की रेंज में हो।
  • नेटवर्क जाम से कोई फर्क नहीं: आम SMS के विपरीत, सेल ब्रॉडकास्ट नेटवर्क कंजेशन (भीड़) से प्रभावित नहीं होता और एक साथ लाखों लोगों तक तुरंत पहुँचता है.

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क्यों जरूरी है यह ‘SACHET’ सिस्टम?

सरकार ने इसे ‘सचेत’ (SACHET) पोर्टल के तहत लागू किया है। इसकी आवश्यकता इन कारणों से है:

  1. त्वरित सूचना: भूकंप, सुनामी, चक्रवात या बिजली गिरने जैसी आपात स्थितियों में लोगों को कुछ सेकंड के भीतर चेतावनी दी जा सकेगी।
  2. सटीक लोकेशन: यह सिस्टम किसी खास भौगोलिक क्षेत्र (Geo-targeted area) के टावरों का उपयोग करता है, जिससे केवल प्रभावित क्षेत्र के लोगों को ही अलर्ट भेजा जा सके।
  3. जान-माल की सुरक्षा: समय रहते चेतावनी मिलने से लोग सुरक्षित स्थानों पर जा सकेंगे, जिससे नुकसान को कम किया जा सकेगा।

निष्कर्ष: भविष्य का ‘लाइफ सेवर’

आज का यह सफल परीक्षण दर्शाता है कि भारत अब आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में आत्मनिर्भर हो रहा है। सरकार ने जनता से अपील की है कि वे इन परीक्षण संदेशों से न घबराएं, क्योंकि यह आने वाले समय में किसी बड़े संकट के दौरान एक ‘जीवन रक्षक’ की भूमिका निभाएगा।

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